Monday, 21 January 2019

शहर

इस  शहर का अस्तित्व

ये बड़ा शहर
बड़ा अकेला है
तब्दीली समय का मिज़ाज है
ये शहर इस लहर में
अपना वजूद खो रहा है

ये शहर उस शख्स को ढूंढ रहा है
जो इसे अपना कहे
इस भरी आबादी में भी
ये बड़ा शहर
बड़ा अकेला है

जिसने इस शहर के साथ
अपना बचपन गुज़ारा था
वो तलाश रहा है
वो बड़ा पेड़, वो टूटी चट्टान
वो कच्चा रास्ता, पुरानी एक तंग गली
समय की धूल ने
सब मिटा दिया है
कुछ नई इमारतें
खिंची हुई है अब ज़मीन से आसमान तक
वो रास्ता जो
जंगलों में गुम हो जाया करता था
उन रास्तों के जँगल
गुम हो गए हैं

इस बदलाव की आंधी में
इस शहर का दम घुट रहा है
बदलते मौसमों के साथ
इस शहर का मौसम भी बदल रहा है

ये शहर गुहार करता है उनसे
जो अपना शहर छोड़ कर यहाँ बसे थे
कि जिनके लिए ये बदलाव किए
वो तो इसे अपना लें

पर वो लोग भी इस शहर में
अपना ही छोड़ा हुआ गाँव ढूंढ रहे हैं
होली पर चराहों पर उड़ता गुलाल
दीवाली पर मिट्टी के दियों की रोशनी
संक्रांत पर पतंगों से भरा आसमान
ढूंढ रहे हैं

इस शहर के नयेपन में
सब गुज़रा हुआ कल ढूंढ रहे हैं

ये शहर क्यों बदला था?
किसके लिए?
ये शहर अपना अस्तित्व ढूंढ रहा है
कि कोई  तो इसे अपना कहे

ये बड़ा शहर
बड़ा अकेला है।

छवि(21.01.2019)