Saturday, 11 September 2021

रिश्ते सामान जैसे

रिश्ते सामान जैसे

वो कीमती सा सामान
जिसकी चमक कुछ भा गई थी
कुछ सोच कर
तो खरीद लाए थे
बहुत संभाल के रखते थे
लगाव से 
खो जाएगा फीका पड़ जाएगा
डरते भी थे,

फिर कुछ दिन गुजरे
जीवन की आपाधापी में
भूल गए
वो सामान जैसे कुछ जगह ले रहा हो
ये सोचके
बक्से में बंद कर 
पीछे कहीं कोने में रख आए थे,

समान धूल खाता रहा
कभी तुमने वो मिट्टी की परतें उतारी भी
पर जगह खाली नहीं मिली
और वो उसी कोने में रखा रहा
कभी मुद्दतों बाद
तुम्हें याद आता
तो फिर उसी कोने में जाकर
कुछ देर उसे देखते कुछ चमकाते
फिर कई रोज 
तुम उसे भूल जाते,

धीरे धीरे वक्त के साथ
ज़ंग लग गया
अब उस सामान 
का मूल क्या लगाओगे
कब तक उसे कोने में रखे रहोगे
या बाज़ार से उसकी जगह
कुछ नया ले आओगे,

अगर जज़्बात होते समान के
तो एक सवाल करता तुमसे
क्यों लाए थे मुझे?
वो सामान अगर एक रिश्ता होता
उस बिखरे पुराने रिश्ते का क्या करते

क्या दिल से निकाल कर
बीते कल को बेच देते?
पुराने सामान जैसे

CS 

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